
लघुरूद्र अभिषेक
रुद्र हे शिवाचे नाव देखील आहे. या शब्दाचा यजुर्वेदात अनेक वेळा उल्लेख आहे. रुद्र म्हणजे रुत आणि रुत म्हणजे दु:खांचा नाश करणारा म्हणजेच जो दु:खांचा नाश करतो तोच रुद्र म्हणजेच भगवान शिव.
रुद्राभिषेक कोणत्याही दिवशी केला जाऊ शकतो, परंतु त्रयोदशी तिथी, प्रदोष काल आणि सोमवारी करणे अत्यंत लाभदायक आहे. श्रावण महिन्यातील कोणत्याही दिवशी केलेला रुद्राभिषेक अप्रतिम असतो आणि लवकर फळ देतो.
पाण्याने अभिषेक, दुधाने अभिषेक, फळांचा रस, मोहरीच्या तेलाने अभिषेक, हरभरा डाळ, काळ्या तिळाचा अभिषेक, मध मिश्रित गंगाजल , तूप आणि मध, कुंकू, केशर, हळद इत्यादीने अभिषेक करता येतो.
सामग्री यादी : |
|
| गणपती | मोठ्या सुपार्या 51 नग |
| शंख | बदाम 05 नग |
| घंटी | खारिक 05 नग |
| हळद 25 ग्रॅम | अक्रोड 05 नग |
| कुंकू 25 ग्रॅम | हळकुंड 05 नग |
| गुलाल 25 ग्रॅम | खडीसाखर 100 ग्रॅम |
| अभिर 25 ग्रॅम | सुके खोबरे 02 नग |
| अष्टगंध 25 ग्रॅम | गुळ 100 ग्रॅम |
| चंदन पावडर 25 ग्रॅम | पंचखाद्य 250 ग्रॅम |
| पिवळी मोहरी 10 ग्रॅम | नारळ 04 नग |
| शतावरी 10 ग्रॅम | तांदुळ 03 किलो |
| भस्म 01 डबी | पत्रावळी 02 नग |
| रांगोळी 250 ग्रॅम | द्रोण 25 नग |
| गोमुत्र 01 बाटली | पंचे 04 नग |
| सुतगुंडी 01 नग | धोतर पान 01 नग |
| पंचरंगी धागा 01 नग | ब्लाऊज पिस 02 नग |
| अत्तर 01 बाटली | विविध प्रकारची सुवासीक फुले 01 किलो |
| जानवी जोड 05 जोड | बेल पत्र 1121 नग |
| गुग्गुळ 10 ग्रॅम | तुळस 01 जुडी |
| धुप 50 ग्रॅम | दुर्वा 01 जुडी |
| माचिस 01 नग | फुलांचे हार 01 नग |
| कापुर 100 ग्रॅम | आंब्याचे डहाळे 02 नग |
| तेल वाती 01 नग | फुलांचे तोरण 01 नग |
| तुप वाती 01 नग | गजरे 05 नग |
| तिळाचे तेल 01 लिटर | वेण्या 02 नग |
| गुलाब पाणी 01 बाटली | विड्याची पाने 25 नग |
| गंगाजळ 01 बाटली | फळे 05 नग ( 01 संच ) |
| अगरबत्ती 01 पुडा | केळी 06 नग |
| मध 01 बाटली | समई 02 नग |
| बेलफळ 02 नग | निरांजन ( तेलाचे व तुपाचे ) प्रत्येकी 01 नग |
| चौरंग 01 नग | पंचामृत 01 वाटी |
| पाट 02 नग | सुट्टे पैसे 101 नाणी |
| आसने 15 नग | पातेल 01 नग |
| ताम्ह्न 03 नग | गाईची प्रतिमा ( चांदीची गाय ) |
| तांब्याचे तांबे 03 नग | कर्मानुसार मुख्यदेवता प्रतिमा शंकराची पिंड |
| पळी 02 नग | नैवेद्य पेढे पाव किलो |
| भांडे ( पंचपात्री ) 02 नग | स्टिलची ताटे 02 नग |
[/trx_sc_table]
अभिषेक पुढील द्रव्यांनी करता येतो
॥ रुद्राभिषेकाचे द्रव्य आणि त्याचे फ़ळ
श्रावण महिन्यातील सोमवार, प्रदोष यादिवशी शंकरावरती दूध, पाणी याने अभिषेक करतात. परंतु काहिवेळा मनात वेगळा संकल्प असल्यास खालील माहितीचा उपयोग करावा.
1) शुद्ध पाण्याचा अभिषेक :- पाउस पडण्यासाठी.
2) कुशोदक(दर्भ घातलेले पाणी) :- व्याधी नाशासाठी.
3) दही :- गोधनादि प्राप्तीसाठी.
4) उसाचा रस :- लक्ष्मीप्राप्तीसाठी. आयुष्याच्या वृद्धिसाठी.
5) मध किंवा तूप :- धन प्राप्तीसाठी.
6) पुण्यतीर्थोदक :- मोक्षप्राप्तीसाठी.
7) गाईचे दूध किंवा साखरमिश्रित पाणी :- पुत्रप्राप्तीसाठी.
8) कर्पूर्मिश्रित पाणी :- ज्वरनाशासाठी.
9) तुपाचा अभिषेक :- वंशविस्तारासाठी.
१०) साखरमिश्रित दूध :- बुद्धिमान होण्यासाठी.
११) मधाचा अभिषेक :- क्षयनाश, पाप, व्याधिनाश.
- वरील अभिषेकांमधील जय द्रव्याचा अभिषेक करायचा असेल त्या द्रव्याची संपुर्ण व्यवस्था यजमानांना करावी
- जेवणाच्या नैवेद्याची व्यवस्था यजमानांना करावी
- चौरंग, पाट, आसने, ताम्ह्न, तांब्याचे तांबे, पळी, भांडे ( पंचपात्री ), स्टिलची ताटे, वाटी चमचे, पातेल, इत्यादि वस्तूंची व्यवस्था यजमानांना करावी लागेल अन्यथा गुरुजीन कडून भाडे तत्वावर पुरवले जाईल.
- घरातील देव, फोटो, गोडाचा शीरा किवा पेढ़े, समई, निरांजन, तेल, तूप ही व्यवस्था यजमानाने करावी.
ठिकाण आणि दक्षिणा:
गुरुजी संख्या – 11
| ठिकाण | दक्षिणा |
| डोंबिवली | 9000/- |
| ठाणे ते दादर | 13000/- |
| पनवेल | 13000/- |
| नवी मुंबई | 13000/- |
| वेस्टर्न | 15000/- |
| टिटवाळा ते कसारा | 11000/- |
| बदलापूर ते कर्जत | 11000/- |
| सामग्री (गुरुजींच्या दक्षिणे व्यतिरिक्त) | 600/- |
[/trx_sc_table]
पूजा बुक करा
