
गुरुचरित्र ग्रंथ पारायण
गुरुचरित्र ग्रंथ सात दिवसांच्या सप्ताहातच किंवा तीन दिवसातच वाचून पूर्ण करावा असा नियम आहे गुरुचरित्र ग्रंथात पारायण म्हणजेच पठन करून पूजा केली जाते. ह्या ग्रंथाला पवित्र वेद समजतात, म्हणून या ग्रंथाचे पारायण कठोर नियमाने करावे. याचे नियम या ग्रंथातच दिलेले अहेत. हा ग्रंथ सात दिवसांच्या सप्ताहातच किंवा तीन दिवसातच पूर्ण करावा असा नियम आहे.
श्री गुरुचरित्र सात दिवसांत वाचायचे असल्यास दर दिवशी वाचण्यासाठी असलेल्या ५३ अध्याय पोथीतील क्रम असा आहे.
सप्ताह पद्धती:
- १ ला दिवस :- १ ते ९ अध्याय
- २ रा दिवस :- १० ते २१ अध्याय
- ३ रा दिवस :- २२ ते २९ अध्याय
- ४ था दिवस :- ३० ते ३५ अध्याय
- ५ वा दिवस :- ३६ ते ३८ अध्याय
- ६ वा दिवस :- ३९ ते ४३ अध्याय
- ७ वा दिवस :- ४४ ते ५३ अध्याय
श्री गुरुचरित्र तीन दिवसात वाचायचे असेल तर पहिल्या दिवशी 24 पूर्ण, दुसर्या दिवशी 37 पूर्ण व तिसर्या दिवशी 53 पूर्ण असा क्रम ठेवावा. सर्वसाधरणपणे श्री गुरुचरित्र वाचनाचा प्रारंभ शनिवारी करुन शुक्रवारी समाप्ती करावी. कारण शुक्रवार हा श्रीपाद श्रीवल्लभ यांचा निजानंदगमनाचा दिवस असतो. अन्यथा भक्तीभावाने केव्हाही वाचाले तरी हरकत नसते. मुहूर्त, वार बघण्याची गरज नसते. मात्र पोथी वाचताना सोवळे जरुर पाळावेत.
गुरुचरित्र पारायण श्रद्धा वाढवण्यासाठी, मनोकामना पूर्ण करण्यासाठी आणि गुरूंचा आशीर्वाद प्राप्त करण्यासाठी केला जातो.
सामग्री यादी : |
|
| गणपती | हळकुंड 5 नग |
| शंख | खडीसाखर 20 ग्रॅम |
| घंटी | सुके खोबरे 02 नग |
| हळद 25 ग्रॅम | गुळ 100 ग्रॅम |
| कुंकू 25 ग्रॅम | पंचखाद्य 100 ग्रॅम |
| गुलाल 25 ग्रॅम | नारळ 3 नग |
| अभिर 25 ग्रॅम | तांदुळ 02 किलो |
| अष्टगंध 25 ग्रॅम | द्रोण 25 नग |
| चंदन पावडर 50 ग्रॅम | पंचे 01 नग |
| रांगोळी 250 ग्रॅम | धोतर पान 01 नग |
| गोमुत्र 01 बाटली | ब्लाऊज पिस 02 नग |
| सुतगुंडी 01 नग | विविध प्रकारची सुवासीक फुले ½ किलो |
| पंचरंगी धागा 01 नग | बेल पत्र 20 नग |
| अत्तर 01 बाटली | तुळस 01 जुडी |
| जानवी जोड 02 जोड | दुर्वा 01 जुडी |
| माचिस 01 नग | फुलांचे हार 01 नग |
| कापुर 25 ग्रॅम | आंब्याचे डहाळे 02 नग |
| तेल वाती 01 नग | फुलांचे तोरण 01 नग |
| तुप वाती 01 नग | विड्याची पाने 30 नग |
| तिळाचे तेल 01 लिटर | फळे 05 नग ( 01 संच ) |
| गुलाब पाणी 01 बाटली | केळी 06 नग |
| गंगाजळ 01 बाटली | गाईचे तुप 100 ग्रॅम |
| अगरबत्ती 01 पुडा | मध 01 बाटली |
| मोठ्या सुपार्या 25 नग | चौरंग 01 नग |
| बदाम 5 नग | आसने 03 नग |
| खारिक 5 नग | ताम्ह्न 03 नग |
| अक्रोड 5 नग | तांब्याचे तांबे 02 नग |
| पळी 01 नग | पंचामृत 01 वाटी |
| भांडे ( पंचपात्री ) 01 नग | सुट्टे पैसे 20 नाणी |
| स्टिलची ताटे 02 नग | पातेल 01 नग |
| समई 02 नग | कर्मानुसार मुख्यदेवता प्रतिमा दत्ताचा फोटो |
| निरांजन ( तेलाचे व तुपाचे ) प्रत्येकी 01 नग | नैवेद्य पेढे पाव किलो |
[/trx_sc_table]
टिप :-
- चौरंग, पाट, आसने, ताम्ह्न, तांब्याचे तांबे, पळी, भांडे ( पंचपात्री ), स्टिलची ताटे, वाटी चमचे, पातेल, इत्यादि वस्तूंची व्यवस्था यजमानांना करावी लागेल अन्यथा गुरुजीन कडून भाडे तत्वावर पुरवले जाईल.
- घरातील देव, फोटो, गोडाचा शीरा किवा पेढ़े, समई, निरांजन, तेल, तूप ही व्यवस्था यजमानाने करावी.
ठिकाण आणि दक्षिणा:
गुरुजी संख्या – 1
| ठिकाण | दक्षिणा |
| डोंबिवली | 9000/- |
| ठाणे ते दादर | 11000/- |
| पनवेल | 11000/- |
| नवी मुंबई | 11000/- |
| वेस्टर्न | 14000/- |
| टिटवाळा ते कसारा | 14000/- |
| बदलापूर ते कर्जत | 14000/- |
| सामग्री (गुरुजींच्या दक्षिणे व्यतिरिक्त) | 500/- |
[/trx_sc_table]
पूजा बुक करा
